औरंगाबाद। औरंगाबाद में आयोजित सात दिवसीय प्रदेश स्तरीय कला महाकुंभ-कला महोत्सव 2026 का रविवार को भव्य समापन हुआ। मीडिया दर्शन, औरंगाबाद कला कौशल मंच एवं महोत्सव परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में बिहार के विभिन्न जिलों से पहुंचे कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पूरे आयोजन के दौरान कला, संस्कृति और प्रतिभा का अनूठा संगम देखने को मिला।
कला महोत्सव की शुरुआत 25 अक्टूबर को शहर स्थित अधिवक्ता संघ सभागार में आयोजित संगोष्ठी से हुई। संगोष्ठी का विषय ‘भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के विकास में कला की भूमिका’ था। इसके बाद 27 से 29 अक्टूबर तक प्रखंड एवं जिला स्तर पर विभिन्न केंद्रों में ऑडिशन आयोजित किए गए। ऑडिशन के माध्यम से प्रत्येक प्रखंड से तीन-तीन प्रतिभागियों का चयन किया गया।
इसके बाद 30 और 31 अक्टूबर को औरंगाबाद में बिहार के विभिन्न जिलों से पहुंचे कलाकारों का ऑडिशन लिया गया। इन प्रस्तुतियों के आधार पर प्रतिभागियों में से टॉप-10 कलाकारों का चयन फाइनल कार्यक्रम के लिए किया गया।
फाइनल में कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुति
कला महोत्सव का फाइनल कार्यक्रम रविवार को शहर के लॉर्ड बुद्धा पब्लिक स्कूल के सिद्धार्थ सभागार में आयोजित हुआ। इस दौरान चयनित कलाकारों ने अपनी अंतिम प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की गायन और नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को विशेष उपाधियों से सम्मानित किया गया। गायन के क्षेत्र में विजेता को ‘बिहार सुरों के बादशाह’, जबकि नृत्य के क्षेत्र में विजेता को ‘भारतनाट्यम नृत्य उस्ताद’ की उपाधि से विभूषित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान नामचीन कलाकारों के साथ-साथ महोत्सव से जुड़े प्रत्येक महोत्सव के दो-दो सक्रिय सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में लॉर्ड बुद्धा पब्लिक स्कूल के निदेशक धनंजय कुमार, महोत्सव पुरुष सिद्धेश्वर विद्यार्थी एवं कला कौशल मंच के अध्यक्ष आदित्य श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन का उद्देश्य बिहार की कला और संस्कृति को मंच प्रदान करना तथा ग्रामीण एवं स्थानीय स्तर पर छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना है। कला महाकुंभ के समापन के साथ कलाकारों और कला प्रेमियों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।