छोटन कुमार
मीडिया दर्शन/तिलौथू । लोकगीतों की मिठास, छठ महापर्व की आस्था और सुरों के जादू से बुधवार को मां तुतला भवानी धाम का माहौल पूरी तरह संगीतमय हो उठा। मौका था तुतला भवानी महोत्सव का, जहां प्रसिद्ध लोकगायिका कल्पना पटवारी ने अपनी दमदार आवाज और शानदार गायकी से ऐसा समां बांधा कि श्रोता झूमने पर मजबूर हो गए। जैसे ही उन्होंने छठ गीत ‘उग हो सूरज देव’ की सुरीली तान छेड़ी, पूरा परिसर गीत के सुरों से गूंज उठा। वहीं, ‘छठ घाट केकरा संगे हम जाइब ए बलम जी’ की प्रस्तुति ने श्रोताओं को लोकगीतों की दुनिया में पहुंचा दिया। छठ की परंपरा, लोकजीवन की मिठास और भावनाओं से जुड़े इन गीतों ने दर्शकों का दिल छू लिया। गीतों के साथ गूंजती तालियों ने सांस्कृतिक संध्या में चार चांद लगा दिए।
कल्पना पटवारी ने एक के बाद एक कई लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी गायकी में भोजपुरी लोकसंस्कृति की मिठास और पर्व-त्योहारों की आत्मीयता साफ झलकी। मंच से उठती सुरों की लहरियों के बीच श्रोता कभी गीतों के साथ गुनगुनाते दिखे तो कभी तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। छठ महापर्व नजदीक होने के बीच छठ गीतों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को खास बना दिया। धार्मिक आस्था और संगीत के इस संगम ने महोत्सव की शाम को यादगार बना दिया।
आर्यन बाबू, तान्या मौआर और मास्टर विकास ने भी बिखेरा जलवा
सांस्कृतिक संध्या में आर्यन बाबू, तान्या मौर और मास्टर विकास ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का रंग भर दिया। वहीं, स्थानीय कलाकारों ने भी मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। स्थानीय प्रतिभाओं को बड़े मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर मिलने से कार्यक्रम में क्षेत्रीय कला और लोकसंस्कृति की विशेष झलक देखने को मिली।
दीप प्रज्वलित कर हुआ महोत्सव का उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन विधान परिषद सदस्य निवेदिता सिंह, विधायिका स्नेहलता कुशवाहा, जिलाधिकारी दीपक मिश्रा, डीएफओ स्टालिन तथा डेहरी के अनुमंडल पदाधिकारी नीलेश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। मां तुतला भवानी धाम की धार्मिक महत्ता और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच आयोजित इस महोत्सव ने आस्था, पर्यटन और संस्कृति को एक मंच पर लाने का संदेश दिया। लोकगीतों की गूंज, कलाकारों की प्रस्तुतियों और छठ गीतों के प्रति श्रोताओं के उत्साह ने आयोजन को विशेष बना दिया। कल्पना पटवारी की सुरीली आवाज में गूंजे छठ गीतों ने महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।