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पटना: गांधी सेतु होगा भारत का सबसे लंबा स्टील ब्रिज

पटना : पूर्वी छोर का उद्घाटन होने के बाद पूरी तरह से पुनर्निर्मित और ऑपरेशनल महात्मा गांधी सेतु (एमजी सेतु) अब यातायात के लिए उपलब्ध होगा। इसका उद्घाटन आगामी 7 जून को होगा। इसके साथ ही गंगा नदी के ऊपर लगभग 5.6 किमी की लंबाई वाला 39 वर्षीय ग

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satyam kumar sinha संवाददाता, Media Darshan
27 मई 2022, 04:26 PM IST (27 मई 2022) अपडेट: 1 अक्टूबर 2026, 10:10 PM IST
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पटना : पूर्वी छोर का उद्घाटन होने के बाद पूरी तरह से पुनर्निर्मित और ऑपरेशनल महात्मा गांधी सेतु (एमजी सेतु) अब यातायात के लिए उपलब्ध होगा। इसका उद्घाटन आगामी 7 जून को होगा। इसके साथ ही गंगा नदी के ऊपर लगभग 5.6 किमी की लंबाई वाला 39 वर्षीय गांधी सेतु देश का सबसे लंबा स्टील ब्रिज बन जाएगा। गांधी सेतु देश का पहला संतुलित ब्रैकेट (कैंटिलीवर) पुल है जिसे ध्वस्त कर एक साधारण समर्थित पुल में बदल दिया गया है। इसके मौजूदा कंक्रीट के पुराने ढांचे को बरकरार रखते हुए ऊपरी ढांचे को इस्पात की छत से बदल दिया गया है। एफकोन्स के परियोजना प्रबंधक संतोष कुमार मिश्रा कहते हैं कि, पहले ट्रैफिक जाम और पुल की खराब स्थिति के कारण लोगों को 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब पुल को सिर्फ 15 से 20 मिनट में पार किया जा सकेगा। गौरतलब है कि इस पुल से प्रतिदिन लगभग एक लाख से अधिक यात्री वाहन गुजरते हैं। चूंकि, यह उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ता है, इसलिए यह पुल राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।(पटना: गांधी सेतु होगा)

मिश्रा कहते हैं, हमने पूरे बहाव वाले क्षेत्र (पूर्वी दिशा) को 18 महीनों में पूरा किया। निर्माण कार्यों को गति देने में हमें विभिन्न कारकों से मदद मिली। जब हम अपस्ट्रीम साइड (पश्चिमी छोर) पर काम कर रहे थे, तब हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। डाउनस्ट्रीम साइड के लिए फ्रेमवर्क का निर्माण पहले से किया गया था। अपनी विघटन पद्धति में हमने काफी सुधार किया साथ ही कई नवाचार का प्रयोग किया, जिसमें वेट स्पैन के लिए होल्डिंग फ्रेम का उपयोग करना शामिल था। मिश्रा ने कहा कि, हमने सेतुबंध के संशोधन और फ्रेमवर्क तैयार करने पर समानांतर रूप से काम किया। पुल के ऊपरी ढांचे को तैयार करने में लगभग 66,360 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है। इसमें बड़े पैमाने पर इस्पात के उपयोग के बारे में विस्तार से बताते हुए परियोजना प्रबंधक ने कहा कि इस परियोजना में बड़े पैमाने पर इस्पात का काम था। इसके लिए पूरे भारत में आपूर्तिकर्ताओं और वर्कशॉप के माध्यम से खरीदारी के साथ निर्माण कार्य पूरा किया गया। नदी के पुल का निर्माण, खासकर बाढ़ संभावित क्षेत्रों में, हमेशा खतरे से भरा होता है।(पटना: गांधी सेतु होगा)

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गांधी सेतु के मामले में भी जोखिम अधिक था। मानसून के दौरान हमें जल स्तर में 7 मीटर तक की वृद्धि के साथ ही नदी क्षेत्र में उच्च विद्युत प्रवाह से भी निपटना पड़ा। बाढ़ की स्थिति तो सामान्य थी और शुष्क मौसम में गाद के कारण शोल बनने से नाव की आवाजाही में बाधा उत्पन्न होती थी। हालांकि, कड़ी मेहनत रंग लाई और प्रोजेक्ट टीम ने प्रतिष्ठित गांधी सेतु को नया जीवन दिया है, इस बात से मिश्रा संतुष्ट हैं। गांधी सेतु इतिहास की किताबों में भारत के सबसे लंबे स्टील ब्रिज और पहले संतुलित ब्रैकेट (कैंटिलीवर) ब्रिज के रूप में दर्ज किया जाएगा, जिसे आसानी से समर्थित ब्रिज में बदला जाएगा। एफकोन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एक निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनी है जिसका मुख्यालय मुंबई में है। इतना ही नहीं 150 वर्षों से ज्यादा के समृद्ध विरासत वाली यह कंपनी शापूरजी पल्लोनजी (एसपी) समूह का हिस्सा है। एफकोन्स भारत की सबसे तेजी से बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है, जिसकी परियोजनाएं 22 से अधिक देशों में हैं।

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