पटना। बिहार की धरती एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान बनाने जा रही है। राजधानी पटना के नजदीक सोनपुर प्रखंड के चंदासी गांव में भारत की सबसे ऊंची अर्धनारीश्वर प्रतिमा का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। यह भव्य प्रतिमा न सिर्फ आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि भारतीय शिल्पकला और आध्यात्मिक पर्यटन का भी बड़ा उदाहरण होगी।
143 फीट ऊंची होगी प्रतिमा निर्माणाधीन अर्धनारीश्वर प्रतिमा की कुल ऊंचाई करीब 143 फीट बताई जा रही है। इसके पूरा होने के बाद यह देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे ऊंची अर्धनारीश्वर प्रतिमा मानी जाएगी। अर्धनारीश्वर स्वरूप में भगवान शिव और माता पार्वती के आधे-आधे रूप को दर्शाया जाता है, जो पुरुष और स्त्री शक्ति के संतुलन का प्रतीक है।
ग्रामीण क्षेत्र में आकार ले रहा भव्य धार्मिक स्थल चंदासी गांव, जो अब तक एक सामान्य ग्रामीण इलाका था, अब इस महापरियोजना के कारण पहचान बना रहा है। प्रतिमा का निर्माण स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग और दान से किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस कार्य में स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों की अहम भूमिका है, जिससे पारंपरिक कला को भी बढ़ावा मिल रहा है।
आधुनिक तकनीक और पारंपरिक शिल्प का मेल प्रतिमा के निर्माण में मजबूत कंक्रीट संरचना के साथ पारंपरिक शिल्पकला का उपयोग किया जा रहा है, ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहे। शिल्पकार हर बारीकी पर ध्यान दे रहे हैं, जिससे शिव-पार्वती के स्वरूप की दिव्यता और भाव दोनों स्पष्ट झलकें।
2027 तक पूरा होने का लक्ष्य परियोजना से जुड़े लोगों के अनुसार, प्रतिमा का निर्माण कार्य 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद यहां मंदिर परिसर, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं और पर्यटन से जुड़ी अन्य व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा.
इस भव्य प्रतिमा के निर्माण से इलाके में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। देश-विदेश से श्रद्धालुओं के आने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। होटल, दुकानें, परिवहन और अन्य सेवाओं में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
बिहार की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई अर्धनारीश्वर प्रतिमा केवल एक धार्मिक संरचना नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बनने जा रही है। यह परियोजना दिखाती है कि कैसे आस्था, कला और विकास एक साथ मिलकर इतिहास रच सकते हैं।