प्रदूषण के लिए देश दुनिया में अब तक देश की राजधानी दिल्ली ही बदनाम रही है और उसे गैस चैम्बर तक का नाम दिया जा चुका है। लेकिन, अब दिल्ली से यह तमगा छीनकर अपने नाम करने के लिए बिहार काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी का नजीता है कि आज की तारीख में देश के दस सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में सात शहर अकेले बिहार राज्य के ही हैं।
आकड़े बता रहे हैं कि बिहार के कई जिलों में हवा की गुणवत्ता बेहद ही खराब हो चुकी है। बिहार में बेलगाम हो रही प्रदूषण की समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है इसका सहज अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कि देश के सबसे ज्यादा 10 पॉल्यूटेड शहरों में 7 शहर तो बिहार के ही हैं। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) ने देश के सबसे ज्यादा पॉल्यूटेड 162 शहरों की जो सूची जारी की है इनमें टॉप 10 शहरों में सात बिहार के शहर शामिल है जबकि दो हरियाणा और एक उत्तर प्रदेश का शहर भी शामिल है।(सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों)
सबसे ज्यादा पॉल्यूटेड शहरों की सूची में बिहार का सीवान (एक्यूआई 398) के साथ टॉप पर है वहीं, दूसरे स्थान पर कटिहार (369 एक्यूआई), तीसरे पर दरभंगा (एक्यूआई 360), चौथे पर हरियाणा का सोनीपत (347 एक्यूआई), पांचवे पर समस्तीपुर (337 एक्यूआई), छठवें पर छपरा (335 एक्यूआई), सातवें पर बेतिया (326), आठवें पर हरियाणा का फरीदाबाद (316), नौवें नंबर पर उत्तर प्रदेश का कानपुर शहर (315 एक्यूआई) और दसवें पर भागलपुर शहर (308 एक्यूआई) का नाम दर्ज है। उल्लेखनीय है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई को इसकी रीडिंग के आधार पर छह कैटेगरी में बांटा गया है। 0 और 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा माना जाता है। 51 और 100 के बीच संतोषजनक माना जाता है जबकि 101 और 200 के बीच मध्यम, 201 और 300 के बीच खराब 301 और 400 के बीच बेहद खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर यानी खतरनाक श्रेणी में माना जाता है।
रिजर्व बैंक गवर्नर की बैंकों में धीमी जमा राशी में वृद्धि पर बैंक प्रमुखों से चर्चा
बीते रविवार को दर्ज इन आंकड़ों को लेकर राजनीति भी आरंभ हो गई है। विरोधी पक्ष सरकार की नीति और नीयत को सवालों के कठघरे में खड़ा करने का भरसक प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में बिहार के शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सूबे के सीएम नीतीश कुमार पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि ‘नीतीश कुमार जी लगता है, प्रदूषण नापने वालों को भी कोई ज्ञान नहीं हैं या फिर सब आपके होम डिलीवरी वाले शराबबंदी से नाराज होकर गलत आंकड़े दे रहे हैं!’