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मुरली भरहवा में पंडई नदी का कहर, खाट पर मरीज ढोने को मजबूर ग्रामीण

गौनाहा के मुरली भरहवा गांव में पंडई नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात हैं। संपर्क पथ कटने से ग्रामीण मरीजों को खाट पर अस्पताल ले जाने को मजबूर हैं।

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Media Darshan संवाददाता, Media Darshan
27 सितंबर 2026, 11:53 PM IST (27 सितंबर 2026) अपडेट: 15 अक्टूबर 2026, 07:05 AM IST
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नरकटियागंज | मीडिया दर्शन

नरकटियागंज अनुमंडल के गौनाहा प्रखंड स्थित ऐतिहासिक गांव मुरली भरहवा इन दिनों पंडई नदी के बढ़ते जलस्तर से गंभीर संकट का सामना कर रहा है। नदी में उफान के कारण गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गया है और संपर्क पथ पूरी तरह कट गया है। इससे ग्रामीणों के सामने आवागमन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

मुरली भरहवा वही गांव है, जहां के अमर सेनानी पंडित राजकुमार शुक्ल ने महात्मा गांधी को चंपारण की धरती पर लाकर स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद आजादी के दशकों बाद भी गांव के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट बनी सहारा

बाढ़ के कारण गांव का सड़क संपर्क टूट जाने से सबसे बड़ी परेशानी बीमार और जरूरतमंद लोगों को हो रही है। गांव में यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस या अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

ऐसे में ग्रामीण मरीज को खाट पर लादकर बाढ़ के पानी के बीच से बाहर ले जाने को मजबूर हैं। तेज बहाव और जलजमाव के बीच इस तरह मरीजों को ले जाना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है।

चुनावी वादों के बाद विकास की रफ्तार थमी

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों की ओर से सड़क, पुल और आवागमन की बेहतर व्यवस्था के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क और स्थायी आवागमन की समस्या बनी हुई है। हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन बाढ़ आते ही स्थिति पहले जैसी हो जाती है।

चेतावनी के साथ स्थायी समाधान की मांग

पंडई नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन की ओर से तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि केवल चेतावनी से उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।

ग्रामीणों ने बाढ़ के दौरान राहत-बचाव की बेहतर व्यवस्था के साथ-साथ स्थायी सड़क, पुल और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज या जरूरतमंद को खाट के सहारे बाढ़ के पानी से होकर न गुजरना पड़े।