ओबरा : आए दिन हम बिजली विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाईयों के बारे में सुनते हैं। जिसमें बिल नहीं जमा करने वाले आम नागरिकों का कनेक्शन विभाग तत्परता से न सिर्फ काटती है बल्कि उनसे बिल जमा करवाने हेतु कानूनी कार्रवाई करने से भी नही चूकती। मगर बात जब सरकारी कार्यालयों की हो तो विभाग उनपर विशेष मेहरबान नजर आती है। बिजली विभाग द्वारा सरकारी कार्यालयों पर बडी़ रकम बकाया होने के बावजूद चुप्पी साधना उनकी मेहरबानी है या विवशता ये तो विभाग ही जानें! मगर सामने आए आंकड़े से यह बात तो तय है की बिजली विभाग के सारे नियम सिर्फ और सिर्फ आम नागरिकों के लिए है।क्योंकि सिर्फ दो हजार रुपये बकाया होने विभाग जहां आम नागरिकों का विधुत कनेक्शन काट देती है। वहीं कई ऐसे सरकारी कार्यालय हैं। जिनका बिजली बिल भले हीं पच्चास हजार रुपये का आंकड़ा पार कर चुका हो। मगर विभाग उनपर कानूनी कार्रवाई तो दूर उनसे पैसे मांगने से भी कतराती है।
जांच के दौरान पता यह भी पता चला कि ओबरा प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित सीओ आवास का विद्युत कनेक्शन आज भी तत्कालीन सीओ अनिल कुमार चौधरी के नाम पर है। अब इसे बिजली विभाग की गलती कहें या सरकारी कार्यालय पर विशेष मेहरबानी का नतीजा। क्योंकि तत्कालीन सीओ द्वारा दिनांक 17/12/2014 में विधुत कनेक्शन लिया गया था। उनके स्थानांतरण को वर्षों बीत गए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब तक एक बार भी बिजली बिल भुगतान नही होने के बावजूद तत्कालीन सीओ अनिल कुमार चौधरी के नाम पर बिजली कनेक्शन अब भी न सिर्फ जारी है बल्कि मौजूदा समय में इस कनेक्शन का बिल 54470 रुपये पहुँच चुका है। वहीं प्रखंड कार्यालय परिसर में स्थित दो हीं कार्यालयों का बिल दो हजार रुपये से नीचे पाया गया। जिसमें प्रोग्रामिंग ऑफिसर तथा विद्युत कनीय अभियंता का नाम शामिल है। मौजूदा समय में प्रोग्रामिंग ऑफिसर के कार्यालय का बिजली बिल 1430 रुपये तो वहीं विद्युत कनीय अभियंता के कार्यालय का बिजली बिल महज 1767 रुपये है।