मसौढ़ी: महासप्तमी के मौके पर मां दुर्गा के पट खुलते ही मसौढ़ी अनुमंडल का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। रविवार को सुबह से ही पूजा पंडालों और देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। पट खुलने के बाद मां के जयकारों से शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक का वातावरण गूंज उठा। सप्तमी के दिन श्रद्धालुओं ने मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
पूजा से पहले हुआ मां का भव्य श्रृंगार
मां दुर्गा के पट खोलने से पहले पूजा समितियों की ओर से प्रतिमाओं का श्रृंगार किया गया। इसके बाद विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। अस्पताल रोड स्थित मां काली मंदिर में भी विशेष पूजा का आयोजन किया गया। सुबह से ही अलग-अलग पूजा स्थलों पर भक्तों की भीड़ जुटने लगी और दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा।
पट खुलने के साथ ही मसौढ़ी में दुर्गापूजा की रौनक और बढ़ गई है। शहर के प्रमुख बाजारों और पूजा स्थलों के आसपास उत्सवी माहौल देखने को मिल रहा है।
अलग-अलग थीम पर तैयार किए गए आकर्षक पंडाल
इस वर्ष पूजा समितियों ने पंडालों को अलग-अलग थीम पर सजाया है। मेन रोड स्थित श्री श्री भारत माता पूजा समिति ने कोलकाता के दक्षिणेश्वर मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार किया है।
वहीं, स्टेट बैंक के पास मां काली पूजा समिति की ओर से मां काली की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। अस्पताल रोड में गुजरात के शिव मंदिर की तर्ज पर बनाए गए पंडाल में मां दुर्गा को घोड़े पर सवार अलग-अलग स्वरूपों में दर्शाया गया है।
संगतपर मोड़ के पास नाव के आकार में बनाया गया पंडाल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
शहर में 32 और पूरे अनुमंडल में 55 पूजा स्थल
जानकारी के अनुसार, मसौढ़ी शहर में इस बार 32 स्थानों पर पूजा पंडाल बनाए गए हैं। वहीं पूरे मसौढ़ी अनुमंडल में कुल 55 स्थानों पर दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है।
सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट
दुर्गापूजा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने भी व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे अनुमंडल में 93 स्थानों पर पुलिस मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई है। इसके अलावा अनुमंडल कार्यालय में नियंत्रण कक्ष बनाया गया है, जहां से पूजा के दौरान होने वाली गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है।
प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के पूजा पंडालों और देवी मंदिरों में दर्शन कर सकें और दुर्गापूजा का पर्व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो।