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पटना में दौड़ेगी बिहार की पहली वाटर मेट्रो, 10 घाटों को जोड़ेगी गंगा की रफ्तार

पटना: बिहार के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राजधानी पटना में राज्य की पहली वाटर मेट्रो जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत गंगा नदी के किनारे 10 घाटों को जोड़ते हुए जल परिवहन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी। इस

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satyam kumar sinha संवाददाता, Media Darshan
8 जनवरी 2026, 03:26 PM IST (8 जनवरी 2026) अपडेट: 1 अक्टूबर 2026, 11:31 AM IST
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पटना: बिहार के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राजधानी पटना में राज्य की पहली वाटर मेट्रो जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत गंगा नदी के किनारे 10 घाटों को जोड़ते हुए जल परिवहन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे खासकर दियारा क्षेत्र और नदी किनारे रहने वाले लोगों को तेज, सस्ता और सुगम आवागमन मिल सकेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना वाटर मेट्रो परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है। यह डीपीआर करीब 769 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत और 45 किलोमीटर की लंबाई पर आधारित है। कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (KMRL) ने इस परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है। अब अगले चरण में निर्माण प्रक्रिया, फंडिंग और जिम्मेदारियों को लेकर केंद्र व राज्य सरकार के बीच समन्वय किया जाएगा।

परियोजना की एक खास चुनौती यह है कि जल परिवहन केंद्र सरकार के अधीन आता है, जबकि गंगा नदी के जल प्रबंधन की जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास है। ऐसे में दोनों सरकारों के सहयोग से ही इस परियोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।

पटना में जिन 10 घाटों को वाटर मेट्रो स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, उनमें पानापुर, फक्कर महतो घाट, नारियल घाट, दीघा घाट, गांधी घाट, गाय घाट, कोनहारा घाट, काली घाट, कंगन घाट और चेचर घाट शामिल हैं।

किराए की बात करें तो पटना वाटर मेट्रो को कोच्चि वाटर मेट्रो मॉडल पर विकसित किया जा सकता है। कोच्चि में किराया करीब 3 रुपये प्रति किलोमीटर है, जहां न्यूनतम टिकट 20 रुपये और अधिकतम 40 रुपये तक है। उम्मीद है कि पटना में भी किराया किफायती रखा जाएगा, ताकि आम लोगों को अधिकतम लाभ मिल सके।

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वाटर मेट्रो शुरू होने से पटना में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और गंगा को शहर के परिवहन तंत्र का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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